शनिवार, 4 जनवरी 2014

जुबां खुली तो बस उसका ही एक नाम आये

जुबां खुली तो बस उसका ही एक नाम आये
हाथ में जब भी मेरे उसका ये रुमाल आये

अदाये है या है फलक पे आतिश--बिजली
पलक गिरे जो कभी,उसका ही ख़याल आये

जुड़ा है नाम मेरा उसकी बंदगी के लिए
इंतज़ार में उसके दिन ढले कि शाम आये

जिधर उठाऊं नजर बस वही मुकम्मल हो
ख़त का जवाब मेरे ,,शायद इस साल आये

तामाम बाते ......ये मेरी हैं आदतें "कौशल
बस इंतज़ार में हूँ वो आयें या उनका हाल आये

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