गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

अर्ज़


अर्ज़ है तुझसे ये सजा न दे
ज़िन्दगी छीन ले दगा न दे__
मुझपे इतना करम तो कर जाना
आग लगती है तो हवा न दे__
तुझे पूजा है मैने सदियों से
फूल ही खिलने दे खिजा न दे __ :कौशल

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

ग़ज़ल >> इश्क


इश्क करना फिर इश्क को  भुला देना    
कारवां ज़िन्दगी का यूँ ही बिता देना  
है बड़े अर्ज़ इस ज़माने वालो को
कौन चाहता है दुनिया में पशेमाँ होना__

हवाए घिरने पे ये गुमा होना
कद्रदां आशमा मेरा होना
इश्क की ताशीर अच्छी लगती है
मुश्किल ही होता है इसे निभा लेना__

क्या जरुरी है यूँ ही तन्हा होना
बैठ कर सारी रात ये गुमा होना
रंग इश्क के बिखर ही जायेंगे
गर बंदगी हो तो इन्हें सजा लेना ___

कुछ बाते समझने का तजरुबा होना
आदमी का वक़्त से रुसवा होना
इश्क कर के फिर उसे भुला देना
दिल दुखता है इश्क में दगा देना___

क़यामत से पहले ये फलसफा होना
हीर-रांझे की तरह इश्क में फ़ना होना
जान जाये या क़त्ल हो जाये
इसकी खिदमत में ज़िन्दगी बिता देना__

-(कौशल)

पशेमाँ=शर्मिंदा ;

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

वो



जब कहीं दिल में आस होती है
वो  कही आस पास होती है
जब भी मिलता हूँ अपने साए से
उसकी ही याद साथ होती है
मुझको मिलना था उससे सदियों से
रोज हर शाम आस होती है
उसके रुकसार को तरसता हूँ
प्यार की जब भी बात होती है
वो मेरा अश्क है या साया है
मेरे ही दिल के पास होती है____: (कौशल )
 

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

कोई आया है शायद ...

शहनाईयां सी बजने लगी जंगल के शौर में 
कोई आया है शायद ...
जिसके लिए दिन रात पलकें बिछाये था ये मन 
ताकते ही ताकते कब दिन हुआ कब ढल गया 
मालूम नहीं ......
वीरानियो की चादरें ओड़े हुए समां
कब ढल गया पिघल गया
मालूम नहीं ......
 दीद की वो रात अब तो याद आयेगी
आँखों में वही प्यास फिर भी क्यों रह गयी
मालूम नहीं .....
शायरी की जुबानी याद "कौशल" आ गयी
'मौत' फिर भी क्यों न आयी 
मालूम नहीं ... - (कौशल :15-sep-2011)

शनिवार, 28 जनवरी 2012

चलते चलते


बेवक्त ही चलने की आदत डालिए
ये शहरे तमाशा है सभी गौर करेंगे.....
किस बात पे मचल रहे ये ख्वाब रोकिये
मरघट पे खड़े हो के सभी बात करेंगे.....
कश्ती जो फंसी हो भवर में तो हो हैरान
डुबोने वाले सक्श तुझे अपने मिलेंगे.....
जब रात ढली हो तो सूरज क्या उगेगा
वो कुछ ख्याल ऐसे ही बेकार रहेंगे...... 
खुशियों में ही जी लो अपने रंग मिजाज
गम में बहाने के लिए आंसू ही मिलेंगे...
जब भी बहारें  आएँगी, भवरे भी आयेंगे 
बाकी समय ख्वाबो में ,यादों में मिलेंगे.....  :( कौशल :२८-०१-२०१२ )

सोमवार, 23 जनवरी 2012

मदहोशी >>>

जुल्फे देख कर ही बस आराम आ गया
शाम होते हाथो में फिर जाम आ गया||१||

मैकदे की बात बड़ी दिलनसी लगे
आठो पहर जुबान में वही नाम आ गया ||२||

पीने की बंदगी हमें मंजूर हो गयी
प्यासे से इन लबो में आज जाम आ गया ||३||

खुल के सुनायी दी वही बाते वो पेरहम
हमको भी याद एक वोही नाम आ गया ||४||

जब से है खोया होश यूहीं मयकदे में बैठ
जामो से झाकता हसीं दिलदार आ गया ||५||

पीता गया गरज से की यार साथ है मेरा
उसका ही अहतराम तो पीना सिखा गया ||६||

लड़खड़ाते कदम, तिस्नगी सी रात का आलम
जाते हुए अजब सा मज़ा आज छा गया ||७||

फिर पी लिया की जी लिया दो दिन का कारवां
दबा हुआ ख़याल कोई दिल पे छा गया ||८||
________________________________
-(कौशल)

सोमवार, 2 जनवरी 2012

नव वर्ष


नव युग की नव चेतना की
नव उज्वलता नव सवेरा
नव दिशाएं नव उजाला
नव करो की बाह खोले
तितलियों के पाख की सी
नव किरण नव ज्योति निर्झर
नव पगों की बात जोहे
कामयाबी हो खड़ी अब
नव विचारो से भरी हो
मनुज की बी दृग निरंतर
आज इस कामना में
नव वर्ष  का करते ही स्वागत    -(कौशल : --२००४ )